सरकारी नौकरी छोडकर खेती से बने करोडपति - SARKARI RESULT | सरकारी रिजल्ट UP | SARKARI RESULT IN HINDI | SARKARI RESULT UP

14 August, 2017

सरकारी नौकरी छोडकर खेती से बने करोडपति

सरकारी नौकरी छोडकर खेती से बने करोडपति:-

जयपुर। आजकल जहां गांव के युवा खेतीबाडी छोडकर नौकरी की तलाश में शहरों का रूख कर रहे वहीं एेसे लोग भी जिन्होंने नौकरी नहीं बल्कि अच्छी खासी सरकारी नौकरी को छोडकर खेती करने का मन बनाया आैर अपनी सूझबूझ के बल पर खेती में सफलता के झण्डे गाड दिए। आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक एेसे ही शख्स के बारे में जिन्होंने सरकारी नौकरी छोडकर खेती को अपनाया। आैर अाज वे खेती से सालाना 1 से 2करोड रूपए का व्यापार करते है। हम बात कर रहे हैं जैसलमेर से 45 किमी की दूर धहिसर गांव के रहने वाले हरीश धनदेव की जिन्होंन अपनी सरकारी नौकरी छोड कर किसान बनने का फैसला किया।
साल 2012  में इंजीनियरिंग की पढार्इ पूरी की आैर 2013 में उन्हें जैसलमेर नगरपालिका में जूनियर इंजीनियर की सरकारी नौकरी मिल गर्इ। लेकिन हमेशा कुछ नया करने की चाहत रखने वाले हरीश का मन दो महीने में ही सरकारी नौकरी से उब गया आैर आखिरकार उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया।इस बीच हरीश के पिता भी सरकारी नौकरी से रिटायर्ड होकर गांव में खेती सम्भाल रहे थे। हरीश अपने पिता का हाथ बटाने खेत पर जाते थे, उन्होंने वहां देखा की भरपूर मेहनत करने के बाद भी खेती में फायदा नहीं हो रहा। इस बात पर मंथन कर हरीश ने उन्नत खेती करने का मन बनाया।
कुछ नया करने की तलाश में जुटे हरीश मुलाकात बीकानेर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में एक व्यक्ति से हुई। हरीश राजस्थान की पारंपरिक खेती ज्वार या बाजरा से अलग कुछ करना चाह रहे थे। सो चर्चा के दौरान हरीश को उन्होंने एलोवेरा की खेती के बारे में सलाह दी। अपने लिए कुछ करने की तलाश में हरीश आगे बढ़े और एक बार फिर दिल्ली पहुंचे जहां उन्होंने खेती-किसानी पर आयोजित एक एक्सपो में नई तकनीक और नए जमाने की खेती के बारे में जानकारी हासिल की। एक्सपो में एलोवेरा की खेती की जानकारी हासिल करने के बाद हरीश ने तय किया कि वो एलोवेरा उगाएंगे। यहीं से कहानी में मोड़ आया और नई शुरुआत को एक दिशा मिल गई। दिल्ली से लौटकर हरीश बीकानेर गए और एलोवेरा के 25 हजार प्लांट लेकर जैसलमेर लौटे।
हरीश बताते है, 'घर में इस बात को लेकर कोई दिक्कत नहीं थी कि मैंने नौकरी छोड़ दी, लेकिन मेरे सामने खुद को साबित करने की चुनौती थी।' काफी खोज-बीन के बाद 2013 के आखिरी में एलोवेरा की खेती की शुरुआत हुई। बीकानेर कृषि विश्वविद्यालय से 25 हजार प्लांट लाए गए और करीब 10 बीघे में उसे लगाया गया। आज की तारीख में हरीश 700 सौ बीघे में एलोवेरा उगाते हैं, जिसमें कुछ उनकी अपनी ज़मीन है और बाक़ी लीज़ पर ली गई है।
जब बीकानेर से एलोवेरा का प्लांट आ गया, इन प्लांटों को खेत में लगाए जाने लगे तब कुछ लोगों ने बताया कि जैसलमेर में कुछ लोग इससे पहले भी एलोवेरा की खेती कर चुके हैं, लेकिन उन सभी को सफलता नहीं मिली। फसल को खरीदने कोई नहीं आया सो उन किसानों ने अपने एलोवेरा के पौधों को खेत से निकाल दूसरी फ़सलें लगा दी। हरिश कहते हैं इस बात से मन में थोड़ी आशंका तो घर कर गई लेकिन पता करने पर जानकारी मिली कि खेती तो लगाई गई थी, लेकिन किसान ख़रीददार से सम्पर्क नहीं कर पाए सो कोई ख़रीददार नहीं आया। अत: हरीश को ये समझते देर नहीं लगी कि यहां उनकी मार्केटिंग स्किल से काम बन सकता है।
हरीश बताते है कि भारत में पतंजलि एलोवेरा का एक बड़ा ख़रीददार है। इसलिए मैनें पतंजलि को मेल भेजकर अपने बारे में बताया। पतंजलि का जवाब आया और फिर मुझसे मिलने उनके प्रतिनिधी भी आए। उच्च गुणवत्ता वाले एलोवेरा ने पतंजलि के विशेषज्ञों को भी अपनी तरफ आकर्षित किया और उन्होंने तुरंत ही एलोवेरा की पत्तियों के लिए ऑर्डर दे दिए।

खोली अपनी कंपनी

देश और विदेश की बढ़ती हुई मांगों के देखते हुए हरीश ने जैसलमेर से 45 किलोमीटर दूर धहिसर में 'नैचुरेलो एग्रो' नाम से अपनी एक कंपनी खोल ली।अब एलोवेरा की सप्लाई से हरीश को सलाना 1.5 से 2 करोड़ रुपये की कमाई हो रही है। हरीश ने एलोवेरा को आधुनिक तरीके से प्रोसेस करने के लिए एक यूनिट भी लगा ली है।
आज ना सिर्फ हरीश की कंपनी नेचरेलो एग्रो की आमद बढ़ी है बल्कि उनके साथ काम करने वालों की आमदनी भी बढ़ी है। हरीश कहते हैं पतंजलि के आने से काम करने के तौर-तरीके भी बदलाव आया और हम अब पहले से ज्यादा प्रोफेशनल तरीके से काम करने लगे हैं।

हरीश कहते हैं कि हमारे यहां उत्पाद में क्वालिटी कंट्रोल का खास ध्यान रखा जाता है। हम अपने उत्पाद को लेकर कोई शिकायत नहीं चाहते सो प्रत्येक स्तर में हमें इसका खास ध्यान रखना होता है कि हम जो पल्प बना रहे हैं उसमें किसी प्रकार की कोई मिलावट या गड़बड़ी ना हो।