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12 August, 2017

Big Breaking News : मदरसों ने कहा, नहीं गाएंगे वंदे मातरम , ऐसा कहने वालों के साथ क्या करना चाहिए

Big Breaking News : मदरसों ने कहा, नहीं गाएंगे वंदे मातरम , ऐसा कहने वालों के साथ क्या करना चाहिए:-


 भोपाल : उत्तर प्रदेश की तरह मध्य प्रदेश के मदरसों में 15 अगस्त के दिन तिरंगा फहराने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विडियोग्राफी कराने का आदेश जारी हुआ है। मदरसा बोर्ड के इस आदेश पर मुस्लिम उलेमाओं ने कुछ नहीं कहा है, लेकिन मुस्लिम संगठन यह मान रहे हैं कि स्वतंत्रता दिवस पर मदरसों में होने वाले कार्यक्रम की विडियोग्राफी कराना राष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल उठाने जैसा है। बीजेपी अध्यक्ष नंदकुमार चौहान 

का कहना है कि इस आदेश में कोई बुराई नहीं है। 

वहीं, बीजेपी प्रवक्ता और उज्जैन से सांसद चिंतामणि मालवीय का कहना है कि अधिकांश मदरसों में स्वतंत्रता दिवस के दिन ध्वजारोहण नहीं होता। यह सुनिश्चित करने के लिए ही विडियोग्राफी कराने का फैसला लिया गया है जो कि बिल्कुल उचित है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. सैयद इमामुद्दीन ने शुक्रवार को जारी किए गए आदेश में कहा कि सूबे के सभी मदरसा संचालक स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने-अपने मदरसों में राष्ट्रीय ध्वज फहराएं।
इस्लामिया मदरसा के संचालक मौलाना नफीस अहमद कासमी ने कहा, इस्लाम के खिलाफ है वंदे मातरम•विशेष संवाददाता, मेरठ 



स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय गीत गाने के मदरसा शिक्षा परिषद के आदेश का मदरसा संचालकों और यहां पढ़ने वाले छात्रों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि हम वंदे मातरम नहीं गाएंगे। इस्लाम में इसकी इजाजत नहीं है। उनका यह भी कहना है कि 'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा...' और राष्ट्रगान गाने में कोई एतराज नहीं है।

यूपी के मदरसा शिक्षा परिषद ने राज्य के सभी मदरसों को स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान गाने का निर्देश दिया है। इसकी विडियो रिकॉर्डिंग करने को भी कहा गया है। मेरठ के कई मदरसा संचालक और छात्र इस आदेश को गलत मानते हैं। उनका कहना है कि वंदे मातरम गाना देशभक्ति का कोई पैमाना नहीं है। सरकार जो चाहे कहे वह इस गीत को नहीं गाएंगे। इस्लामिया मदरसा के संचालक और मवाना के काजी मौलाना नफीस अहमद कासमी का कहना है कि वंदे मातरम इस्लाम के खिलाफ है। यह हमारे मजहब के खिलाफ है। वंदे मातरम गाने से ही देशभक्ति का सबूत जाहिर नहीं होता। इसका ताल्लुक तो दिल से है। ये इस्लामिक तालीम का हिस्सा है कि वतन से मोहब्बत की जाए, लेकिन ये जरूरी नहीं की जिससे मोहब्बत हो उसकी पूजा करें या उसके सामने सर झुकाएं। उनका कहना है कि वंदे मातरम ज्यादातर मदरसों में नहीं गाया जाएगा। अफसर चाहें विडियोग्राफी कराएं, इसमें हमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन हम वंदे मातरम नहीं गाएंगे। उर्दू मदरसा टीचर आफरीन का कहना है कि सरकार का मदरसों में वंदे मातरम गाने का आदेश ठीक नहीं है। राष्ट्रगान से उन्हें कोई एतराज नहीं। मदरसा छात्र अब्दुल मन्नान का कहना है कि वंदे मातरम हम नहीं गाएंगे। सरकार को आदेश वापस लेना चाहिए। मदरसा छात्र मोहम्मद अफजाल का कनहा है कि वंदे मातरम पर पहले भी बहस हो चुकी। इस पर दारुल उलूम की ओर से पहले ही फतवा जारी हो चुका है। वंदे मातरम हमारी मजहबी रिवायत के खिलाफ है, हम इसको नहीं गाएंगे।