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12 August, 2017

समायोजित शिक्षामित्रों को 25 जुलाई तक का वेतन देगी सरकार, मानदेय पर अभी भी संशय

समायोजित शिक्षामित्रों को 25 जुलाई तक का वेतन देगी सरकार, मानदेय पर अभी भी संशय:-


सहायक अध्यापक पद पर समायोजित किए गए शिक्षामित्रों को 25 जुलाई तक का समायोजित पद का वेतन दिया जाएगा। इस बाबत बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस आदेश के बाद यह तो साफ हो गया है कि 25 जुलाई के बाद से शिक्षामित्रों को मानदेय से ही संतोष करना पड़ेगा लेकिन मानदेय कितना होगा, यह विभाग ने अब तक स्पष्ट नहीं किया है। हालांकि समायोजन से पूर्व शिक्षामित्रों को 3500 रुपये मानदेय दिया जा रहा था।
प्रदेश में तकरीबन एक लाख 37 हजार शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत इन सभी शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद समायोजन निरस्त कर दिया गया है।
न्यायालय के आदेश के बाद तमाम जनपदों से उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को पत्र भेजकर पूछा गया था कि शिक्षामित्रों को समायोजित पद का वेतन देना है या नहीं और देना है तो किस तिथि तक वेतन का भुगतान होना है।
मानदेय पर अभी भी स्थिति साफ नहीं
मामले में सचिव संजय सिन्हा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय 25 जुलाई को दोपहर के वक्त आया था। इसलिए सहायक अध्यापक पद पर समायोजित शिक्षामित्रों को 25 जुलाई तक का वेतन भुगतान किया जा सकता है।
सचिव ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों और बेसिक शिक्षा के वित्त एवं लेखाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वेतन भुगतान अविलंब कर दिया जाएगा।
हालांकि इस बाबत स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है कि शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद का वेतन भुगतान बंद होने के बाद कितना मानदेय मिलेगा। हालांकि समायोजन से पूर्व उन्हें प्रतिमाह 3500 रुपये मानदेय के रूप में दिए जा रहे थे।
कोर्ट ने रद्द कर दिया था समायोजन
बीते 26 जुलाई को अच्छे शिक्षको की नितांत आवश्यकता बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बतौर सहायक शिक्षक शिक्षामित्रों के समायोजन को निरस्त करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया था।
हालांकि शीर्ष अदालत ने शिक्षामित्रों को राहत देते हुए कहा था कि अगर ये शिक्षामित्र टीईटी (सहायक शिक्षक के लिए जरूरी अर्हता) पास हैं या भविष्य में पास कर लेते हैं तो सहायक शिक्षकों के लिए होने वाली दो नियुक्ति प्रक्रिया में उन पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि राज्य सरकार चाहे तो समायोजन के पूर्व की स्थिति में शिक्षामित्रों की सेवा जारी रख सकती है।
न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को तो सही ठहराया लेकिन कहा कि सहायक शिक्षकों के तौर पर समायोजित किए गए शिक्षामित्रों को रियायत मिलनी चाहिए।
पीठ ने अपने फैसले में कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सहायक शिक्षकों की होने वाली दो लगातार नियुक्ति प्रक्रियाओं में टीईटी पास शिक्षामित्रों पर विचार किया चाहिए। संबंधित अथॉरिटी चाहे तो इसमें शिक्षामित्रों को आयुसीमा में छूट दे सकती है और उनके तजुर्बे को वेटेज दे सकती है।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 17 मई को उत्तर प्रदेश के 1.78 लाख शिक्षामित्रों पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 सिंतबर 2015 को इन शिक्षामित्रों का सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजन रद्द कर दिया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।