अंग्रेजी की पढ़ाई को चयनित स्कूल, कैसे चलेंगे अंग्रेजी स्कूल, ढूंढ़े नहीं मिल रहे शिक्षक - SARKARI RESULT | सरकारी रिजल्ट UP | SARKARI RESULT IN HINDI | SARKARI RESULT UP

22 February, 2018

अंग्रेजी की पढ़ाई को चयनित स्कूल, कैसे चलेंगे अंग्रेजी स्कूल, ढूंढ़े नहीं मिल रहे शिक्षक

अंग्रेजी की पढ़ाई को चयनित स्कूल, कैसे चलेंगे अंग्रेजी स्कूल, ढूंढ़े नहीं मिल रहे शिक्षक:

शिक्षकों की कमी से मुख्यालय को अवगत कराया गया है। मुख्यालय के निर्देशानुसार शिक्षकों से एक बार फिर आवेदन मांगा गया है। उन्हें 23 फरवरी तक आवेदन करना है। इसके बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी। -बीबी चौधरी, बेसिक शिक्षा अधिकारी

शिक्षकों ने पहले चरण में किया है आवेदन

आराजीलाइन विकास खंड में प्राथमिक विद्यालय, मिर्जामुराद, जन्सा, कचनार, पनियरा व कल्लीपुर, बड़ागांव विकास खंड में प्राथमिक विद्यालय कठिरांव, घमहापुर, धौकलगंज, कनियर व सगुनहा, चिरईगांव विकास खंड में प्राथमिक विद्यालय कोटवां, जयरामपुर, रमचंदीपुर, सरैया-1, व उमरहां-2, चोलापुर विकास खंड में प्राथमिक विद्यालय नियार, रौनाखुर्द, परानापट्टी, पलकहा और रजला, हरहुआ विकास खंड में प्राथमिक विद्यालय बेलवरिया, औसानपुर, पुआरीखुर्द, होलापुर व चंदापुर, काशी विद्यापीठ विकास खंड में प्रथामिक विद्यालय केशरीपुर, मंडुवाडीह, भुल्लनपुर, बनपुरवा व बच्छांव, ¨पडरा विकास खंड में प्राथमिक विद्यालय चुप्पेपुर, परसादपुर, ¨पडराई, फूलपुर, सरायखेड़ा, सेवापुरी विकास खंड में प्राथमिक विद्यालय ठठरा, खगरापुर, देहलीविनायक, करचना और रामेश्वर तथा नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय धूपचंडी, सुदंरपुर-1,पिसनहरिया, मलदहिया और शिवपुरवा शामिल हैं।

प्रदेश सरकार अगले सत्र से चुनिंदा सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई शुरू कराने की तैयारी में है मगर अपेक्षित संख्या में शिक्षक ही नहीं मिल रहे। चयनित 45 विद्यालयों के लिए 225 शिक्षकों की जरूरत है। पहले चरण में सिर्फ 70 शिक्षकों ने आवेदन किया है। अब दोबारा आवेदन मांगा जा रहा है। आठ ब्लाक और नगर क्षेत्र के 45 स्कूलों में पहली अप्रैल से अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई होनी है। प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों से ही अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के लिए शिक्षकों का चयन होना है। फिलहाल जरूरत के अनुसार शिक्षक नहीं मिल पाये हैं। इससे अफसर बेचैन हैं। शासन से लगातार मॉनीटरिंग हो रही है। उम्मीद थी कि विशिष्ट बीटीसी में चयनित ऐसे शिक्षक जो पहले अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ा चुके हैं, वे दिलचस्पी दिखाएंगे। मगर उन्होंने भी रुचि नहीं दिखाई। इसके पीछे तीन कारण माने जा रहे हैं। पहला, इन विद्यालयों में पढ़ाने पर शिक्षकों को अलग से कोई इंसेटिव (प्रोत्साहन भत्ता) नहीं दिया जा रहा है। दूसरा, इन विद्यालयों के शिक्षकों को अपना प्रदर्शन दिखाना पड़ेगा। तीसरा, उन्हें उन विद्यालयों को छोड़ना होगा जहां उन्होंने सोर्स-पैरवी लगाकर तैनाती पाई है।

ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने के लिए जक्खिनी में राजकीय अभिनव विद्यालय का शुभारंभ दो साल पहले हुआ। यहां भी शिक्षकों का संकट हो गया है। सीबीएसई बोर्ड से चलने वाले इस विद्यालय में 11वीं में पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक नहीं है। विद्यालय की दसवीं कक्षा में इस साल 77 बच्चे हैं जो अगले सत्र में कक्षा-11 में जाएंगे। मानक के अनुसार यहां कला, विज्ञान व वाणिज्य की कक्षाएं चलनी हैं। इसके लिए दस प्रवक्ताओं की जरूरत है। कक्षा छह से दस तक के लिए सिर्फ छह शिक्षक हैं। इनमें भी अंग्रेजी का एक भी शिक्षक नहीं है। सरकार ने वादा किया था कि बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जाएगी। उन्हें किताब-कॉपी और यूनिफार्म भी मुफ्त मिलेगा। मगर अभिभावकों को किताब-कापी और यूनिफार्म खरीदना पड़ा। इस समय विभिन्न कक्षाओं में 384 छात्र पढ़ रहे हैं। स्कूल में कम्प्यूटर लैब तो तैयार है, लेकिन अब तक कम्प्यूटर नहीं आया है। छात्रवास का निर्माण चल रहा है। प्रधानाचार्य जयराम सिंह भी मानते हैं कि शिक्षकों की कमी से बड़ी समस्या आने वाली है। उन्होंने कई बार उच्चधिकारियों को लिखा है। उम्मीद है कि पहली अप्रैल से पहले शिक्षकों की तैनाती हो जाएगी।